रायपुर। राजधानी के लाभांडी स्थित आबकारी भवन में आग लगने की घटना को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। घटना के बाद जहां कांग्रेस ने इसे साज...
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रायपुर। राजधानी के लाभांडी स्थित आबकारी भवन में आग लगने की घटना को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। घटना के बाद जहां कांग्रेस ने इसे साजिश करार देते हुए भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना ठोस आधार के इस तरह के आरोप लगाना राजनीतिक गैर-जिम्मेदारी को दर्शाता है।
साय ने कहा, “इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने से किसी का भला नहीं होता। इससे सिर्फ आरोप लगाने वाले की सोच पर सवाल उठते हैं। अगर किसी के पास ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सामने लाना चाहिए, लेकिन बिना जांच के साजिश बताना उचित नहीं है।”
महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित होने का दावा
विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया गया कि आग के पीछे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट करने की साजिश हो सकती है। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आग की घटना जरूर हुई है, लेकिन किसी भी अहम दस्तावेज के जलने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जरूरी फाइलें और रिकॉर्ड सुरक्षित हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कराई जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।
कांग्रेस ने लगाए घोटाले के आरोप
गौरतलब है कि आबकारी भवन में आग लगने के बाद कांग्रेस ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब से जुड़े कथित घोटालों पर पर्दा डालने के उद्देश्य से आग लगाई गई हो सकती है। कांग्रेस ने मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।
हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
राजनीतिक माहौल गरम
इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस सरकार को घेरने में जुटी है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे निराधार और राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया मुद्दा बता रही है।
अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी और इसके पीछे कोई लापरवाही या साजिश थी या नहीं। तब तक यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।
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