रायपुर। देशभर में चल रहे एलपीजी संकट (LPG crisis) की मार राजधानी के छात्र-छात्राओं पर भी पड़ रही है। गैस की भारी किल्लत के कारण राजधान...
रायपुर।
देशभर में चल रहे एलपीजी संकट (LPG crisis) की मार राजधानी के
छात्र-छात्राओं पर भी पड़ रही है। गैस की भारी किल्लत के कारण राजधानी
स्थित मेडिकल कॉलेज और पीआरएसयू समेत कई अन्य विश्वविद्यालयों के
छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की परेशानी जस की तस बनी हुई है।
हालात
इतने खराब हैं कि पिछले 20 दिनों से छात्रों के मेन्यू से रोटी पूरी तरह
से गायब हो चुकी है। गैस बचाने के लिए पिछले दिनों खाने के मेन्यू में जो
कटौती की गई थी, वह आज भी वैसे ही लागू है।
मजबूरी में छात्रों को
सिर्फ दाल-चावल खाकर ही अपना पेट भरना पड़ रहा है। सुबह के नाश्ते का भी
यही हाल है। पहले जहां छात्रों को सुबह गर्म नाश्ता मिलता था। वहीं अब गैस
बचाने के चक्कर में उन्हें केवल फल देकर काम चलाया जा रहा है। गैस सिलिंडर
की आपूर्ति सामान्य न होने से हालात बेकाबू हो गए हैं।
कई
छात्रावासों में तो खाना पकाने के लिए अब पुरानी व्यवस्था यानी लकड़ी के
चूल्हे पर लौटना पड़ा है। मेस के कर्मचारी भारी धुएं के बीच लकड़ियों के
सहारे खाना पकाने को मजबूर हैं।
आम दिनों के अलावा छात्रावास के
मेन्यू के हिसाब से छात्रों को रविवार और बुधवार को भोजन और नाश्ते में कुछ
विशेष खाने-पीने की सामग्री दी जाती थी। लेकिन लंबे समय से चल रहे गैस
संकट के कारण इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
पीआरएसयू के मेस
संचालक सुधीर चंद्रवंशी ने परेशानी बताते हुए कहा कि रसोई गैस की सप्लाई
नहीं होने से उन्हें बाजार से ब्लैक में 4,500 रुपये में सिलिंडर खरीदना
पड़ा है। इतनी महंगी गैस से रोज का पूरा खाना बनाना संभव नहीं है।
इसलिए
गैस बचाने के लिए लकड़ियों का भी इंतजाम कर रहे हैं। लकड़ी व गैस दोनों का
इस्तेमाल करके किसी तरह छात्रों के लिए खाना तैयार कर रहे हैं।
मेस
संचालकों का कहना है कि अगर यह किल्लत ज्यादा दिनों तक ऐसे ही चली तो
छात्रों को समय पर खाना देने में भारी दिक्कत हो सकती है। सबसे बड़ी चिंता
की बात यह है कि अब यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में परीक्षाओं का दौर शुरू हो
रहा है।
परीक्षा के इस तनाव वाले समय में छात्रों को सही समय पर और
अच्छा पोषणयुक्त भोजन मिलना बहुत जरूरी है। लेकिन बाहर से आकर पढ़ाई कर रहे
इन छात्रों को सही खाना नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई
दोनों पर बुरा असर पड़ने का डर है।
गैस की कमी अब भी बनी हुई
है। मेस में मेन्यू से रोटी सहित कुछ आयटम कम कर दिए गए हैं। मेस संचालक
बड़ी मुश्किल से गैस का इंतजाम कर पा रहा है।
-डॉ. रेशम सिंह, अध्यक्ष, जूडा (मेडिकल कॉलेज रायपुर)
छात्रों के लिए भोजन की कोई समस्या न हो, ऐसे निर्देश मेस संचालक को दिए
गए हैं। लेकिन यह सच है कि अब भी गैस की समस्या तो है। इसलिए लकड़ी और गैस
दोनों पर खाना बनाया जा रहा है।
-प्रो. राजीव चौधरी, पीआरओ (पीआरएसयू)
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