दो लाख रुपये के ऋण से शुरू किया किराना व्यवसाय रायपुर । बस्तर के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम जैबेल की निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग की...
दो लाख रुपये के ऋण से शुरू किया किराना व्यवसाय
रायपुर । बस्तर के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम जैबेल की निवासी अनुसूचित
जनजाति वर्ग की महिला श्रीमती शामबती बघेल ने अपनी मेहनत और शासन की योजना
का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री युवा
स्वरोजगार योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को
मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। श्रीमती शामबती बघेल ने
बताया कि उनके परिवार में कुल छह सदस्य हैं। परिवार के पास सीमित कृषि भूमि
होने के कारण केवल खेती से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में
उन्होंने अपने पति श्री रतन बघेल के सहयोग से गांव में ही एक छोटा सा
किराना दुकान शुरू किया, लेकिन कुछ समय बाद पूंजी की कमी के कारण दुकान
चलाने में परेशानी आने लगी। इसी दौरान बकावंड में आयोजित जनसमस्या शिविर
में जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जगदलपुर के अधिकारियों से उन्हें
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद
उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जगदलपुर कार्यालय जाकर योजना की
विस्तृत जानकारी प्राप्त की। गांव के मुख्य मार्ग पर उनका घर होने और
आसपास किराना दुकान नहीं होने के कारण ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के
लिए लगभग 10 किलोमीटर दूर बकावंड जाना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए
शामबती बघेल ने किराना दुकान को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए दो लाख
रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया। दिसंबर 2022 में पंजाब नेशनल बैंक की
जैबेल शाखा द्वारा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत उन्हें दो
लाख रुपये का ऋण स्वीकृत एवं वितरित किया गया। इस राशि से उन्होंने अपने
किराना दुकान को व्यवस्थित रूप से संचालित करना शुरू किया।
शामबती बघेल ने बताया कि अब उन्हें दुकान चलाते हुए लगभग तीन वर्ष हो
चुके हैं। उन्होंने समय पर पूरी ऋण राशि का भुगतान भी कर दिया है। वर्तमान
में उनकी दुकान से प्रतिदिन लगभग एक हजार से डेढ़ हजार रुपये तक की बिक्री
होती है, जिससे उन्हें रोजाना करीब 500 से 700 रुपये की आमदनी हो रही है।
आज उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर हो गई है।
परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और गांव के लोगों को भी घर के
पास ही आवश्यक सामान उपलब्ध हो रहा है। शामबती बघेल आज आत्मनिर्भर बनकर
अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन यापन कर रही हैं। वह अपने चार बच्चों की
पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रही हैं और बड़ी बेटी कुंजवती बघेल को बकावंड कॉलेज
में कॉमर्स में दाखिला करवाया है तो मंझले बेटे नेत्र बघेल को गांव के हायर
सेकेंडरी स्कूल में 10 वीं कक्षा में पढ़ा रही हैं। दो छोटे बेटे जसवंत और
देवांश गांव के उच्च प्राथमिक शाला में 8 वीं एवं तीसरी में पढ़ाई कर रहे
हैं। साथ ही शामबत्ती खेती-किसानी को भी नई दिशा देकर अब रबी सीजन में
मक्का की खेती कर रही हैं।
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