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केवल आबकारी अधिकारी के बयान पर नहीं दी जा सकती सजा

  बिलासपुर: तखतपुर के चर्चित अवैध महुआ शराब मामले में शासन (आबकारी विभाग) को जिला अदालत से बड़ा झटका लगा है। दशम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आदि...

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बिलासपुर: तखतपुर के चर्चित अवैध महुआ शराब मामले में शासन (आबकारी विभाग) को जिला अदालत से बड़ा झटका लगा है। दशम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत ने निचली अदालत द्वारा आरोपित को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए शासन की अपील को खारिज कर दिया है।

मामला आबकारी वृत्त तखतपुर का है। 23 दिसंबर 2018 को आबकारी उपनिरीक्षक अनिल मित्तल ने बिना सर्च वारंट के ग्राम चंदाडोंगरी निवासी पन्ना पाली के घर दबिश देकर आठ लीटर महुआ शराब जब्त करने का दावा किया था। तखतपुर न्यायालय ने 19 सितंबर 2024 को सबूतों के अभाव में आरोपित को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ शासन ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।

सत्र न्यायालय ने रिकार्ड की समीक्षा के बाद पाया कि जब्ती के स्वतंत्र गवाह सालिकराम और जगेंद्र केंवट कोर्ट में मुकर गए। उन्होंने साफ कहा कि उनके सामने कोई शराब जब्त नहीं हुई, अधिकारियों के कहने पर केवल दस्तखत किए थे। इसके अलावा जांच अधिकारी ने माना कि नजरी नक्शा मौके पर नहीं बल्कि दफ्तर में बना, मकान के स्वामित्व का कोई राजस्व रिकार्ड नहीं लिया गया और न ही शराब की पुष्टि के लिए कोई केमिकल लैब रिपोर्ट पेश की गई। अदालत ने कहा कि इतनी कमियों के बाद केवल अधिकारी के बयान पर सजा नहीं दी जा सकती।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जब स्वतंत्र गवाह मुकर जाएं और जांच में गंभीर कमियां हों, तो आरोपित को संदेह का लाभ मिलना तय है। बरी होने के बाद आरोपित की बेगुनाही की धारणा और मजबूत हो जाती है। कोर्ट ने आरोपित के बेल-बांड को भी मुक्त करने के आदेश दिए हैं।

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