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ऑनलाइन फ्रॉड:बारहवीं के छात्र की मोबाइल स्क्रीन पर आया पैसे कमाने का मैसेज

मुलमुला कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को मोबाइल दिया गया। इससे पढ़ाई तो आसान तो हुई, लेकिन यही मोबाइल परेशानी का सबब बन गया है। अनज...

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मुलमुला

कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को मोबाइल दिया गया। इससे पढ़ाई तो आसान तो हुई, लेकिन यही मोबाइल परेशानी का सबब बन गया है। अनजाने में बच्चे इंटरनेट से मिलने वाले मैसेज को भी एक्सेप्ट कर लेते हैं। ऐसे ही एक मामले में बारहवीं के एक छात्र ने ऑनलाइन शापिंग वेबसाइट से मिले मैसेज से अपने पिता जी के करीब एक लाख रुपए खर्च कर डाले।


मामला मुलमुला थाना क्षेत्र के गांव का है। प्राइवेट जॉब करने वाले वाले रतिराम यादव ( बदला हुआ नाम) के पुत्र शेखर यादव बारहवीं का छात्र है। कोरोना में स्कूल बंद होने के कारण उसे ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मेाबाइल दिया था। उसके मोबाइल पर एक नोटिफिकेशन स्नेप डील मर्चेंट सेंटर नाम के वेबसाइट पर शॉपिंग टास्क पूरा करने पर राशि दोगुनी होने को मैसेज अाया। दोगुनी रकम की लालच में अपने पिता एंव भाई के अकाउंट से करीब 1 लाख 1 हजार रुपए खाली कर दिए । शुरुआत में प्रलोभन देने वाली वेबसाइट ने नाबालिग को कुछ राशि लाभ के तौर पर लौटा भी दिया। ऐसा कर ठगी का सिलसिला व शॉपिंग की रकम भी बढ़ती गई और आंकड़ा 1 लाख रुपए तक जा पहुंचा । अकाउंट से एकाएक पैसा खाली होने पर पिता को इसकी सूचना मिली तब जाकर इसकी शिकायत मुलमुला थाने में की है।

बेटे ने मोबाइल पर बना ली थी यूपीआई आईडी: पिता

नाबालिग के पिता ने बताया कि खाते से पैसे कम होने की जानकारी नहीं मिलती थी और उन्होंने कभी अपने फोन पर यूपीआई ही नहीं चलाया। नाबालिग ने उनके फोन पर पहले यूपीआईआईडी बनाई और धीरे धीरे कर ट्रांजेक्शन करता रहा । जब सारी जानकारी बड़े भाई को लगी तब उसने उसके पिता को बताया।

टास्क पूरा करने के लिए वाट्सएप मैसेंजर में आते थे क्यू आर कोड

शेखर ने बताया कि सबसे पहले उसने अपने मोबाइल के स्क्रीन पर पैसे कमाने के लिए नोटिफिकेशन आया। जिसे उसने क्लिक किया एक स्नेप डील मर्चेंट सेंटर नाम के वेबसाइट में विजिट की और रजिस्ट्रेशन भी किया फिर उस वेबसाइट पर अपना वाट्सएप वाला मोबाइल भी एड किया। जिसमें हेल्प डेस्क नाम से शॉपिंग को लेकर टास्क पूरा करने निर्देश खुलते गए। टास्क में शर्त ये थी कि वेबसाइट से शॉपिंग में वेब साइट मर्चेंट को सामान बेचने मदद करनी थी, तब उसे उस सामान की लागत की राशि मे करीब 300 से 5000 रुपये तक एक्स्ट्रा पैसे मिलते । जैसे किसी मोबाइल फोन की कीमत 10 हजार है और वह उसे वेबसाइट में दिखाए टास्क में मर्चेंट को पैसे लगाने में मदद करता तो उसे सभी टास्क पूरा होने के बाद करीब 1 हजार रुपए एक्स्ट्रा मिलते । वेबसाइट में पेमेंट पूरा करने के लिए उसे उसके एंड्रायड मोबाइल पर एक क्यू आर कोड मिलता जिसे वह अपने पिता के फोन से स्कैन कर यूपीआई से पेमेंट कर देता था, ऐसे ही उसने 13 ,15 व 16 नवंबर तक करीब 1 लाख 1 हजार रुपये के ट्रांजेक्शन कर दिये।

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