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आयुष्मान भारत योजना एवं डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना का संचालन कर रहे आयुष्मान मित्रों की रोजी-रोटी संकट में…

रायपुर:   केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संपूर्ण देश में आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का मुख्य उद्देश्य निर्धन वर्ग के लो...

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रायपुर: केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संपूर्ण देश में आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का मुख्य उद्देश्य निर्धन वर्ग के लोगों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के लिखित निर्देश पर राज्य नोडल एजेंसी की ओर से निजी अस्पतालों में आयुष्मान मित्र रखने का आदेश टीपीए बीमा कंपनी के पक्ष में जारी किया गया है।

जिसकी वजह से 31 जनवरी के बाद प्रदेश भर के 845 आयुष्मान मित्रों की नौकरी समाप्त की गई है। नियुक्ति पत्र में लादी गई शर्तें एवं ईमेल के जरिए परिवारों का आर्थिक खर्च चला रहे आयुष्मान मित्रों की अचानक सेवा समाप्त होने से उनका जीवन संकटमय हो गया है।

उक्ताशय की जानकारी प्रेसक्लब में आयोजित पत्रकारवार्ता में आयुष्मान मित्र संघ के पदाधिकारी पुनेश कुमार डहरिया, संगीता पाल एवं अन्य ने दी। पत्रकारवार्ता में वार्ताकारों ने बताया कि सदस्यों की सेवाएं प्रदेश के निजी अस्पतालों में 8 से 9 वर्ष की है।

अधिक उम्र होने के कारण अधिकांश की अन्य जगह नौकरी लगना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा 20 जनवरी 2022 को जारी किए गए पत्र क्रमांक 40/2019/104/1054 में निजी अस्पतालों को आयुष्मान मित्र स्वयं रखने का एक फरवरी से आदेश जारी किया गया है, जबकि पूर्व में कार्यरत आयुष्मान मित्रों की सेवा को दरकिनार उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी गई है।

डहरिया एवं पाल ने शासन पर आरोप लगाया कि उक्त टीपीए कंपनी के साथ मिलकर निजी अस्पतालों द्वारा जमकर बिलिंग करने की योजना में सदस्य आड़े आ रहे हैं, इसलिए उन्हें नौकरी से निकाला गया है। पदाधिकारियों ने शासन के जिम्मेदारों एवं मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से एकसूत्रीय उक्त समस्या का समाधान नहीं करने पर धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

ज्ञातव्य है कि टीपीए बीमा कंपनी द्वारा पूर्व में भी शहर के अनेक अस्पतालों में भाजपा शासनकाल में वहां के संचालकों के साथ मिलकर मरीजों से जमकर बिल बनाकर वसूलीबाजी की गई है। कोरोनाकाल में स्वयं कोविड मरीज होने के बाद भी 845 आयुष्मान मित्रों की अचानक सेवाएं समाप्त करने से शासन की मंशा पर प्रश्नचिन्ह लगता है।

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