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गाजा नरसंहार का आरोप: जर्मनी के खिलाफ ICJ में केस दर्ज

  नई दिल्ली । डेस्क: अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में एक बार फिर जर्मनी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. हेग स्थित विश्व अदालत में निकाराग...

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नई दिल्ली । डेस्क: अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में एक बार फिर जर्मनी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. हेग स्थित विश्व अदालत में निकारागुआ द्वारा जर्मनी पर लगाए गए उन गंभीर आरोपों की सुनवाई शुरू हो गई है, जिनमें बर्लिन पर गाजा में संभावित 'नरसंहार को बढ़ावा देने' और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करने का दावा किया गया है. जर्मनी अब इस पूरे मामले को शुरुआती चरण में ही खारिज कराने और अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है.


निकारागुआ के आरोप और कानूनी दलीलें


निकारागुआ ने वर्ष 2024 में ICJ का रुख करते हुए तर्क दिया था कि जर्मनी ने 1948 के नरसंहार समझौते (Genocide Convention) के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन किया है. निकारागुआ का कहना है कि गाजा में नरसंहार के स्पष्ट जोखिम के बावजूद जर्मनी इज़राइल को सैन्य उपकरण और हथियार आपूर्ति कर रहा है. इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी (UNRWA) की फंडिंग रोकने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए थे. निकारागुआ के नीदरलैंड्स में राजदूत का तर्क था कि जर्मनी आत्मरक्षकों की कार्रवाई और नरसंहार के अंतर को समझने में नाकाम रहा है.


जर्मनी का रुख और प्राथमिक आपत्तियां


अमेरिका के बाद इज़राइल का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता जर्मनी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता आ रहा है. बर्लिन ने अदालत से इस मामले को तुरंत रद्द करने का अनुरोध किया है. जर्मनी के विदेश मंत्रालय की कानूनी सलाहकार जूलिया मोनार ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि निकारागुआ ने मामला दर्ज करने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, और यह शिकायत ICJ के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. इससे पहले जर्मनी ने स्पष्ट किया था कि उसकी हथियार निर्यात प्रक्रिया बेहद सख्त है और प्रदान की गई अधिकांश सामग्री सुरक्षात्मक उपकरण श्रेणी की थी.


अदालती प्रक्रिया और भावी राह


फिलहाल हेग में चार दिवसीय सुनवाई जारी है, जिसके बाद न्यायाधीशों को यह तय करना होगा कि क्या मामला खारिज किया जाए या आगे बढ़ाया जाए. इस तरह के शुरुआती फैसलों में आमतौर पर लगभग छह महीने का समय लगता है. यदि जर्मनी की आपत्तियां खारिज हो जाती हैं, तो मामला मुख्य सुनवाई के दौर में चला जाएगा, जिसमें सालों लग सकते हैं. जिस प्रकार दक्षिण अफ्रीका द्वारा इज़राइल के खिलाफ दर्ज कराए गए मुख्य नरसंहार मामले की प्रक्रिया लंबी खींचती दिख रही है, ठीक उसी तरह इस मामले के अंतिम निर्णय में भी एक लंबा समय लग सकता है.


गाजा की मौजूदा स्थिति


यह कानूनी लड़ाई ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब गाजा में हालात लगातार नाजुक बने हुए हैं. संघर्ष विराम के बावजूद जारी सैन्य कार्रवाइयों के बीच भारी जान-माल का नुकसान हुआ है. गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तबाह हो चुका है, हजारों लोग मलबे में लापता हैं और जनहानि का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. विश्व अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों के बावजूद क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा बना हुआ है.

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