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बिलासपुर: 25 हजार रुपये रिश्वत लेने वाला पटवारी सस्पेंड, सोशल मीडिया पर वायरल पुराना वीडियो

  बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जहां शासकीय राजस्व कार्य के बदले 25 हजार रुपय...

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बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जहां शासकीय राजस्व कार्य के बदले 25 हजार रुपये की घूस लेने वाले पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पचपेड़ी तहसीलदार द्वारा सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में घूस लेने की पुष्टि होने के बाद यह आदेश जारी किया. 

कलेक्टर के अनुसार, पटवारी का यह कृत्य सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है, जिसने राजस्व विभाग की छवि को धूमिल किया है. निलंबन की इस अवधि के दौरान पटवारी का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा कार्यालय तय किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. इसके साथ ही पचपेड़ी तहसीलदार को 7 दिनों के भीतर पटवारी के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर पेश करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद हुई. यह वीडियो लोहर्सी सोन गांव के निवासी ओम प्रकाश साहू द्वारा बनाया गया था, जब ऋषिपुरी गोस्वामी वहां पदस्थ थे. 

उस समय कपिल साहू नामक व्यक्ति की जमीन का बटांकन करने के एवज में पटवारी ने 50 हजार रुपये की मांग की थी. पैसे देते समय बनाए गए वीडियो में पटवारी शुरुआत में राशि लेने से मना करते हुए कहता है कि ‘ये पैसा मेरी जेब में जाता तो ठीक रहता’, लेकिन बाद में 25 हजार रुपये रखते हुए हिदायत देता है कि ‘मामला क्लियर ही रखना, कहीं बाद में झुकना न पड़ जाए.’

यह मामला उस समय और उलझ गया जब पटवारी का स्थानांतरण पचपेड़ी हल्का में हो गया. वहां पदस्थापना के दौरान उन्होंने कपिल साहू के एक राजस्व मामले को बिगाड़ दिया, जिसके बाद उन पर केस सुधारने का दबाव बनाया जाने लगा और रिश्वत वाले इस वीडियो को सार्वजनिक करने की चेतावनी दी गई. 

ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर पटवारी ने करीब एक हफ्ते पहले पचपेड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने दोनों पक्षों को बयान दर्ज कराने के लिए थाने बुलाया, जहां सामाजिक बदनामी के डर से पटवारी ने समझौते का रास्ता चुन लिया. हालांकि, थाने में समझौते के बावजूद सालभर पुराना यह रिश्वत कांड सोशल मीडिया पर लीक हो गया, जिसके बाद प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा.

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