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निगम और पेट्रोल डीलरों के बीच बढ़ता विवाद

  धमतरी। महापौर, निगम सभापति, आयुक्त और उपायुक्त का वाहन पिछले कुछ दिनों से खराब हो चुका है। मरम्मत के लिए वाहनों को भेजा गया है, ऐसे में ...

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धमतरी। महापौर, निगम सभापति, आयुक्त और उपायुक्त का वाहन पिछले कुछ दिनों से खराब हो चुका है। मरम्मत के लिए वाहनों को भेजा गया है, ऐसे में मंगवार को निगम सभापति कौशिल्या देवांगन को स्वयं की व्यवस्था ई-रिक्शा से कार्यालय आना पड़ा।

वहीं, महापौर रामू रोहरा भी स्वयं के वाहन से कार्यालय पहुंचे। इधर निगम आयुक्त, इंजीनियर के वाहन को उपयोग कर रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल देने वाले संचालक ने उधारी देना बंद किया

दूसरी ओर नगर निगम को पेट्रोल-डीजल देने वाले संचालक ने अब उधारी देना बंद कर दिया है। ऐसे में महापौर समेत निगम प्रशासन पेट्रोल-डीजल की खपत में पहले से कमी लाने कटौती शुरू कर दी है।

350 से 400 लीटर प्रतिदिन की खपत को 200 से 100 लीटर तक लाने प्रयास किया जा रहा है। सभापति के अचानक ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचने की बात पर महापौर रामू रोहरा ने जवाब देते हुए बताया कि वह भी पिछले कई दिनों से स्वयं की व्यवस्था व वाहन से निगम कार्यालय पहुंच रहे हैं।

सभी को स्वयं की व्यवस्था में कार्यालय आना पड़ रहा है

पिछले 25 दिनों से उनका भी वाहन खराब हो चुका है। इतना ही नहीं निगम सभापति, आयुक्त और निगम उपायुक्त का भी वाहन खराब हो चुके हैं। सभी वाहनों को मरम्मत के लिए भेजा गया है, लेकिन इन वाहनों के मरम्मत के लिए प्रति वाहन एक से दो लाख रुपये खर्च बताया जा रहा है।

निगम प्रशासन से नई गाड़ी खरीदी जाएगी या फिर राज्य सरकार से नई गाड़ी की मांग की जाएगी। खराब वाहन को बार-बार मरम्म्त कराने से रुपये की बर्बादी है। इस समय तक फिलहाल सभी को स्वयं की व्यवस्था में कार्यालय आना पड़ रहा है।
खर्च कम करने पेट्रोल-डीजल में भी कटौती

महापौर रामू रोहरा ने यह भी बताया कि इन दिनों ईरान, इजराइल और अमेरिका युद्ध के बाद पेट्रोल पंपों में पेट्रोल-डीजल की आवक संतोषप्रद नहीं है। ऐसे में कई संचालकों ने उधारी बंद कर दिया है। इस कड़ी में नगर निगम धमतरी को भी पेट्रोल व डीजल उपलब्ध कराने वाले पंप संचालक ने उधारी में पेट्रोल-डीजल देना बंद कर दिया है।

निगम में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की पहल

नकद में पेट्रोल-डीजल खरीदना मुश्किल है। इस स्थिति को देखते हुए फिलहाल निगम में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने पहल की जा रही है। प्रतिदिन नगर निगम में जेसीबी, सफाई समेत अन्य वाहनों के लिए 400 लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत है। इसे अब कम करके 200 से 100 लीटर तक करने की तैयारी है।

पेट्रोल-डीजल खपत में कटौती से आवश्यक कार्य कुछ ही प्रभावित होंगे। व्यवस्था में सुधार आने तक फिलहाल कुछ दिनों तक यह पहल निगम में की जा रही है। उल्लेखनीय है कि नगर निगम में प्रति माह पेट्रोल-डीजल के लिए आठ लाख रुपये से अधिक खर्च होता है।



source https://www.laltennews.com/2026/04/blog-post_75.html

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