रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने राज्य के प्राइवेट स्कूलों के संचालन और उनकी मान्यता को लेकर दिशा-निर्देश जा...
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने राज्य के प्राइवेट स्कूलों के संचालन और उनकी मान्यता को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने जा रही इस नई नियमावली के बाद कोई भी गैर-सरकारी विद्यालय बोर्ड से बिना पूर्व स्वीकृति लिए नवी कक्षा से बारहवीं तक की कक्षाएं नहीं चला सकेगा.
वर्ष 2018 के पुराने प्रावधानों को समाप्त कर बनाए गए इन नए नियमों में एक ओर जहां प्रशासनिक और कागजी जटिलताओं को दूर कर संचालकों को बड़ी राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ कक्षाओं की बनावट, सुरक्षा मानकों और शैक्षणिक सुविधाओं के संदर्भ में कड़ाई बढ़ा दी गई है.
नई गाइडलाइन के तहत अब प्राइवेट स्कूलों के लिए एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट प्राप्त करने की अनिवार्यता पूरी तरह खत्म कर दी गई है. इसके स्थान पर संस्थापकों को आधिकारिक वेब पोर्टल पर स्वयं सत्यापित (सेल्फ-अटेस्टेड) शपथ पत्र अपलोड करना होगा. इस सेल्फ-डिक्लेरेशन में भवन की मजबूती, प्रयोगशालाओं की स्थिति, लाइब्रेरी, खेल मैदान और योग्य शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति संबंधी सही ब्योरा देना होगा.
भ्रामक या गलत जानकारी दिए जाने की स्थिति में संबंधित विद्यालय की मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी और भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा. इसके अलावा कॉर्पस फंड की अनिवार्यता भी हटा ली गई है, हालांकि अब संचालकों को अपने कर्मचारियों के वेतन भुगतान हेतु पर्याप्त बजट का प्रमाण देना होगा तथा शैक्षणिक सत्र खत्म होने के तीन महीने के भीतर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट सौंपनी होगी.
इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी ढांचे के मामले में बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि हाईस्कूल और हायर सेकंडरी (प्लस-टू) की मान्यता अब एक साथ प्रदान नहीं की जाएगी. संस्थाओं को पहले हाईस्कूल की स्वीकृति लेनी होगी, जिसके पश्चात ही वे प्लस-टू स्तर के लिए आवेदन कर सकेंगे. यदि कोई संस्थान हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में शिक्षा देना चाहता है, तो उसे दोनों माध्यमों के लिए पृथक-पृथक भूमि, भवन, प्रिंसिपल तथा अध्यापकों की व्यवस्था करनी होगी.
इतना ही नहीं, एक ही परिसर के भीतर दो अलग-अलग शैक्षणिक बोर्डों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. स्कूल की जमीन संचालक के नाम पर होना अथवा न्यूनतम तीन वर्षों का पंजीकृत लीज एग्रीमेंट होना अनिवार्य है, साथ ही स्थानीय निकाय (नगर निगम या पंचायत) से स्वीकृत नक्शा और बहुमंजिला इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना जरूरी होगा.
छात्रों की सुरक्षा और बैठने की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक कक्षा का आकार कम से कम 300 वर्गफीट निर्धारित किया गया है, जिसमें अधिकतम 45 विद्यार्थी ही अध्ययन कर सकेंगे. मानक के अनुसार प्रत्येक बच्चे के लिए कम से कम छह वर्गफीट का स्थान होना अनिवार्य है.
हाईस्कूल स्तर पर कम से कम सात कमरों की उपलब्धता, पर्याप्त खेल मैदान, प्रार्थना स्थल तथा वाहनों की पार्किंग हेतु आरक्षित जगह का होना अनिवार्य किया गया है. मंडल ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नियम उल्लंघन के कारण यदि किसी विद्यालय की मान्यता रद्द होती है, तो वहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें नजदीकी शासकीय विद्यालयों में समायोजित किया जा
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