Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

Breaking News:

latest

ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक की अवैध इजराइली बस्तियों के उत्पादों पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध

  लंदन । डेस्क: यूनाइटेड किंगडम ने अधिकृत वेस्ट बैंक में स्थित अवैध इजराइली बस्तियों से उत्पादित सभी वस्तुओं के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगान...

यह भी पढ़ें :-

 


लंदन । डेस्क: यूनाइटेड किंगडम ने अधिकृत वेस्ट बैंक में स्थित अवैध इजराइली बस्तियों से उत्पादित सभी वस्तुओं के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है. पिछले वर्ष फिलिस्तीनी राष्ट्र को दी गई मान्यता के बाद यह ब्रिटेन की विदेश नीति में अब तक का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. संसद को संबोधित करते हुए ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने खुलकर कहा कि वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों का तेजी से होता विस्तार पूरी तरह गैरकानूनी है. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इजराइल वहां फिलिस्तीनियों का जातीय सफाया कर रहा है और ब्रिटिश जनता यह कदापि नहीं चाहेगी कि उनके बाजारों में बस्तियों के उत्पाद बेचकर इस अवैध कब्जे का समर्थन किया जाए.


ब्रिटेन के इस सख्त कदम के साथ ही इजराइल और यूके के कूटनीतिक संबंधों में भारी तनाव आ गया है. इस घोषणा के जवाब में इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने चार कड़े जवाबी उपायों का ऐलान कर दिया. इजराइल ने जेरूसलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने, ब्रिटिश सांसदों के प्रवेश पर रोक लगाने और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी अधिकारियों को दी जाने वाली ब्रिटिश सैन्य ट्रेनिंग को तुरंत प्रभाव से समाप्त करने का फैसला किया है. इजराइली नेताओं ने ब्रिटेन के इस कदम को राजनीतिक हस्तक्षेप करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जबकि ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसकी कार्रवाई इजराइल के आम नागरिकों के खिलाफ नहीं, बल्कि वहां की नीतियों और अवैध कब्जे के खिलाफ है. 



प्रतिबंधों का दायरा और व्यापार पर संभावित असर


ब्रिटेन सरकार द्वारा लागू किए गए नए व्यापारिक प्रतिबंधों के तहत वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों से आने वाले सभी सामानों के आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. इसके अलावा, बस्तियों के निर्माण, बुनियादी ढांचे, वित्तपोषण या रियल एस्टेट गतिविधियों में शामिल कंपनियों और व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध आयद किए गए हैं. ब्रिटेन में अवैध बस्तियों की संपत्तियों के विज्ञापनों पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. साथ ही, कब्जे को बढ़ावा देने वाले किसी भी नए हथियार या रक्षा उपकरण के निर्यात लाइसेंस को रद्द करने का फैसला लिया गया है. हालांकि, इजराइल के अपने आधिकारिक क्षेत्र से आने वाले उत्पादों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है.


आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में ब्रिटेन और इजराइल के बीच कुल व्यापार लगभग छह अरब पाउंड का रहा था, जिसमें से अधिकृत क्षेत्रों की बस्तियों से आयातित सामान का हिस्सा केवल 3.8 करोड़ पाउंड का था. हालांकि यह आर्थिक आंकड़ा कुल व्यापार का बेहद छोटा हिस्सा है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक और राजनीतिक प्रभाव बेहद गहरा है. ब्रिटेन के इस कदम के बाद फ्रांस, कनाडा, स्पेन, आयरलैंड, नॉर्वे और पोलैंड समेत 12 अन्य देशों ने भी एक संयुक्त बयान जारी कर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है और इसी तरह के व्यापारिक प्रतिबंध लागू करने के संकेत दिए हैं.


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और अमेरिकी असहमति


ब्रिटेन के इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है. अमेरिका ने इस निर्णय से खुद को पूरी तरह अलग रखा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बयान दिया कि वाशिंगटन ब्रिटेन के इस रास्ते पर नहीं चलेगा और ऐसे फैसलों से गजा शांति प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है. वहीं इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने ब्रिटेन पर यहूदी विरोधी भावना से काम करने का आरोप लगाया. दूसरी ओर, फिलिस्तीनी दूतावास और मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम का जोरदार स्वागत किया है. मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह ब्रिटेन की नीति में वर्षों बाद आया एक सकारात्मक और ऐतिहासिक बदलाव है जो केवल बयानों तक सीमित न रहकर ठोस कार्रवाई की तरफ बढ़ता है.


घरेलू स्तर पर बहस और भविष्य की राह


ब्रिटेन के भीतर इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. ब्रिटिश यहूदी संगठनों और धार्मिक नेताओं ने इस कदम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे ब्रिटेन में यहूदी विरोधी घटनाओं और उग्रवाद को बढ़ावा मिल सकता है. इसके जवाब में विदेश मंत्री मिलिबैंड ने आश्वस्त किया कि ब्रिटेन में यहूदी समुदाय की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सरकार किसी भी प्रकार के भेदभाव से सख्ती से निपटेगी. विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि यह प्रतिबंध आर्थिक रूप से बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इसने यूरोपीय देशों के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है, जिससे भविष्य में इजराइल पर कूटनीतिक दबाव और अधिक बढ़ सकता है. 

No comments