कांकेर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक समय जहां माओवादियों का खौफ और दहशत का साया रहता था, वहां अब 'मिशन रक्षक' जैसी...
कांकेर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक समय जहां माओवादियों का खौफ और दहशत का साया रहता था, वहां अब 'मिशन रक्षक' जैसी अनूठी पहल से बदलाव की नई बयार बह रही है. यह विशेष अभियान युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रहा है और हजारों युवक-युवतियों को भारतीय सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों तथा राज्य पुलिस बल में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा है.
कांकेर के कोयलीबेड़ा, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर और आमाबेड़ा स्थित प्रशिक्षण शिविरों में सुबह का नजारा किसी क्रांति से कम नहीं होता. नक्सली भय के पूरी तरह समाप्त होने के बाद अब स्थानीय युवा निडर होकर वर्दी पहनने का सपना साकार कर रहे हैं.
इन केंद्रों पर रोजाना करीब 1,200 उम्मीदवार पसीना बहा रहे हैं. इस पहल के तहत अब तक 3,500 से अधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें 1,000 से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं. दूर-दराज की 20 पंचायतों के लगभग 400 युवा भी इस कार्यक्रम से जुड़ चुके हैं.
अभ्यर्थियों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस बल व्यापक सहयोग प्रदान कर रहे हैं. सीमा सुरक्षा बल (BSF), छत्तीसगढ़ पुलिस और शिक्षा विभाग के प्रशिक्षक युवाओं को शारीरिक फिटनेस और ग्राउंड ट्रेनिंग दे रहे हैं, वहीं विषय विशेषज्ञ लिखित परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे हैं. कांकेर पुलिस दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर युवाओं को सीधे राष्ट्र निर्माण से जोड़ रही है.
कांकेर पुलिस अधीक्षक निखिल राखेजा के अनुसार, दशकों तक माओवादियों ने अपने दुष्प्रचार और भौगोलिक अलगाव का फायदा उठाकर युवाओं को गुमराह किया. 'मिशन रक्षक' न केवल युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक जीवन दे रहा है, बल्कि उन्हें समाज में शांति और विकास का नया संवाहक भी बना रहा है.
स्थानीय युवाओं का कहना है कि पहले सरकारी नौकरियों और सुरक्षा बलों की तैयारी के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन अब बेहतर कोचिंग और खेल प्रशिक्षण मिलने से उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है. प्रशासन जल्द ही इस योजना का विस्तार जिले के अन्य इलाकों में भी करने जा रहा है
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