रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों में अभी दो साल का समय शेष है, लेकिन राज्य में राजनीतिक समीकरणों की बिसात बिछनी शुरू हो...
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों में अभी दो साल का समय शेष है, लेकिन राज्य में राजनीतिक समीकरणों की बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है. पोला तिहार के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढाल दास साहेब ने कांग्रेस का दामन थाम लिया.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई. भूपेश बघेल ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु ढाल दास के आने से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और पार्टी अपने सिद्धांतों के साथ और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगी.
सतनामी समाज में गहरा प्रभाव रखने वाले गुरु ढाल दास का यह कदम राज्य के सियासी गणित को प्रभावित कर सकता है. सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस परिवार के रुख से कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
छत्तीसगढ़ की कुल 90 विधानसभा सीटों में से लगभग 20 सीटों पर सतनामी समाज का सीधा प्रभाव माना जाता है. राज्य की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति वर्ग की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत है, जो मुख्य रूप से मैदानी क्षेत्रों में बसी हुई है और बाबा गुरु घासीदास द्वारा स्थापित सतनामी संप्रदाय के प्रति गहरी आस्था रखती है.
चुनावी इतिहास पर नज़र डालें तो यह वर्ग हमेशा से सत्ता की कुंजी साबित हुआ है. वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से 10 सीटें अधिक जीतकर बढ़त बनाई थी, वहीं 2018 के चुनावों में बड़ा उलटफेर करते हुए कांग्रेस ने 71 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की थी और भाजपा 14 सीटों पर सिमट गई थी.
ऐसे में इस प्रभावशाली सामाजिक वर्ग को साधे रखने की कवायद के बीच गुरु ढाल दास का कांग्रेस में प्रवेश आगामी राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से अत्यंत निर्णायक माना जा रहा है.
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