कानपुर (ब्यूरो)। सिनेमा हाल में दर्शकों के बीच चर्चा बटोर रही फिल्म &हनुमान अंश&य में नीब करौरी बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता...
कानपुर (ब्यूरो)। सिनेमा हाल में दर्शकों के बीच चर्चा बटोर रही फिल्म &हनुमान अंश&य में नीब करौरी बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्या ने बताया कि फिल्म बनाना उनके लिए महज अभिनय का काम नहीं था, बल्कि आस्था और जिम्मेदारी से जुड़ा अनुभव रहा। फिल्म की टीम बुधवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) पहुंची। यहां आयोजित प्रेस वार्ता में फिल्म से जुड़े कलाकारों और टीम ने फिल्म बनने के पीछे की कहानी साझा की।
टिकट नहीं मिली तो टीम छोड़कर जाने लगी
शोभिनव सत्या ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान एक ऐसा दौर भी आया, जब टीम के कई लोग काम छोड़कर जाने लगे थे। मुंबई से उत्तर प्रदेश आने के लिए पूरी टीम को ट्रेन से सफर करना था, लेकिन टिकट नहीं मिल रही थी। हालात ऐसे बने कि टीम के सामने शूटिंग को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कई लोगों ने काम छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन निर्देशक विशाल चतुर्वेदी अपनी जिद पर अड़े रहे। उनका कहना था कि परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल हों, फिल्म को हर हाल में पूरा किया जाएगा। इसी जिद और टीम की मेहनत से फिल्म का सफर आगे बढ़ा।
बाबा का किरदार निभाना अभिनय नहीं, आस्था थी
शोभिनव सत्या ने कहा कि नीब करौरी बाबा का किरदार निभाना उनके लिए सामान्य अभिनय नहीं था। “बाबा के आशीर्वाद के बिना इस किरदार को निभाना और एक भी शब्द बोल पाना मुमकिन नहीं था.” उन्होंने बताया कि किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए टीम ने बाबा के जीवन, उनके व्यक्तित्व और उनसे जुड़े प्रसंगों को समझने की कोशिश की। उनके मुताबिक, इस किरदार को निभाते समय हर संवाद और हर दृश्य के पीछे एक अलग तरह की जिम्मेदारी महसूस होती थी।
सिर्फ डिवोशनल फिल्म नहीं, कहानी में कई सरप्राइज
फिल्म के निर्देशक, प्रोड्यूसर और लेखक विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि &हनुमान अंश&य को सिर्फ एक डिवोशनल फिल्म मानना सही नहीं होगा। फिल्म में आध्यात्मिकता के साथ ऐसे कई दृश्य और प्रसंग हैं, जो दर्शकों को अलग अनुभव देंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश फिल्म को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की है। यदि दर्शकों का प्यार और समर्थन मिलता है तो फिल्म को अलग-अलग शहरों और स्थानों पर भी ले जाकर दिखाया जाएगा।
कानपुर और आसपास के कलाकारों को मिला मौका
विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि फिल्म में कानपुर और आसपास के कई कलाकारों ने भी काम किया है। फिल्म की कहानी नीब करौरी बाबा यानी महाराज जी के जीवन और उनसे जुड़े प्रसंगों पर आधारित है। टीम का कहना है कि फिल्म के जरिए महाराज जी के जीवन के उन पहलुओं को पर्दे पर लाने की कोशिश की गई है, जिन्हें लोग किस्सों और संस्मरणों में सुनते आए हैं।
20 साल तक पढ़ा, फिर फिल्म बनाने का आया ख्याल
फिल्म के लेखक ने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से महाराज जी के बारे में पढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में उनके साथ कुछ ऐसे अनुभव और घटनाएं हुईं, जिनसे महाराज जी पर फिल्म बनाने की इच्छा और मजबूत हुई। उन्होंने बताया कि फिलहाल फिल्म की कहानी में वर्ष 1943 तक के घटनाक्रम को दिखाया गया है। अभी कहानी कानपुर तक नहीं पहुंची है। आगे बनने वाले हिस्सों में महाराज जी के जीवन से जुड़े दूसरे प्रसंगों और किस्सों को पर्दे पर लाने की तैयारी है।
फिल्म का दूसरा पार्ट भी आएगा
लेखक ने संकेत दिया कि &हनुमान अंश&य की कहानी यहीं खत्म नहीं होगी। आगे इसके दूसरे हिस्से में महाराज जी के जीवन से जुड़े और प्रसंग दर्शकों तक पहुंचाए जाएंगे। यानी पर्दे पर महाराज जी की कहानी का यह सफर अभी लंबा चलेगा। प्रेस वार्ता के बाद फिल्म की टीम ने विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में छात्रों से संवाद किया। कलाकारों ने फिल्म निर्माण, अभिनय और महाराज जी के किरदार को पर्दे पर उतारने के अनुभव साझा किए। छात्रों ने फिल्म और कलाकारों से जुड़े सवाल भी पूछे।
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