बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण और स्थायी गुजारा भत्ता के भुगतान में लापरवाही बरतने वाले एक पति को कड़ा संदेश द...
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण और स्थायी गुजारा भत्ता के भुगतान में लापरवाही बरतने वाले एक पति को कड़ा संदेश दिया है. अदालत ने 5 लाख रुपये के स्थायी गुजारा भत्ते के आदेश में संशोधन करने से साफ इनकार कर दिया है.
पति ने खुद को मजदूर बताते हुए एकमुश्त राशि देने में असमर्थता जताई थी और किस्त में भुगतान की अनुमति मांगी थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया.
जस्टिस संजय कुमार जायसवाल और जस्टिस बिभू दत्त गुरु की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल वित्तीय तंगी का बहाना बनाकर अदालत के आदेश से बचा नहीं जा सकता.
रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता ने 5 लाख रुपये के गुजारा भत्ते में से अब तक महज 8,000 रुपये का भुगतान किया है. इसके अलावा, पत्नी के पक्ष में तय किए गए 5,000 रुपये प्रतिमाह के अंतरिम भरण-पोषण का भी पिछले साढ़े पांच सालों से कोई भुगतान नहीं किया गया है.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि स्थायी गुजारा भत्ता देने का मुख्य उद्देश्य महिला को वित्तीय स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करना है. जब लंबी अवधि से भरण-पोषण की राशि और गुजारा भत्ता का बड़ा हिस्सा बकाया हो, तो आदेश में किसी भी प्रकार का संशोधन कानून के उद्देश्य को विफल कर देगा.
अदालत ने पति की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए उसे पूरी राशि एकमुश्त जमा कराने के निर्देश दिए हैं.
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